मेरी विटिलिगो यात्रा: एक ई-रिक्शा वाले भाई ने समाज को इंसानियत का असली पाठ पढ़ाया
नमस्कार दोस्तों,
मैं हूँ रविन्द्र जायसवाल, और आप पढ़ रहे हैं Vitiligo Support India।
आज मैं अपनी “मेरी विटिलिगो यात्रा” का एक ऐसा अनुभव साझा करना चाहता हूँ, जो छोटा जरूर है, लेकिन उसने मुझे समाज की सोच और इंसानियत का एक गहरा सच समझाया।
एक साधारण सफर, एक गहरा अनुभव
होली की छुट्टियों में मैं हरदोई गया हुआ था।
मार्केट से वापस लौटते समय मैं और मेरी पत्नी एक ई-रिक्शा में बैठे।
रिक्शा कुछ ही दूर चला था कि सामने से एक माँ अपनी दो बेटियों के साथ आती दिखाई दीं। ई-रिक्शा वाले भाई ने उन्हें बैठने के लिए आवाज दी।
उन्होंने हमारी तरफ देखा…
और बिना कुछ बोले आगे बढ़ गईं।
रिक्शा थोड़ा आगे बढ़ा तो वह भाई मेरी तरफ देखकर बोला—
“दादा, आप समझ गए कि वो लोग रिक्शा में क्यों नहीं बैठे?”
मैंने मुस्कुराते हुए कहा—
“हाँ, उन्होंने हमें देखा और सोचा कि हमें सफेद दाग है।”
जब एक अनजान व्यक्ति ने समझदारी दिखाई
मेरी बात सुनते ही वह ई-रिक्शा चालक दुखी हो गया।
उसे उनकी सोच पर अफसोस था।
बातों-बातों में मैंने कहा—
“कभी-कभी लगता है कि इन पढ़े-लिखे लोगों से तो अनपढ़ लोग ज्यादा अच्छे होते हैं।”
मेरी यह बात सुनकर वह मुस्कुराया और बोला—
“दादा, हम भी पढ़ रहे हैं। पुलिस की तैयारी कर रहे हैं, और हमारे रिश्तेदार भी बड़े-बड़े पदों पर हैं।”
उसकी यह बात सुनकर मुझे बहुत खुशी हुई।
क्योंकि उसकी सोच में सम्मान, समझदारी और इंसानियत साफ दिखाई दे रही थी।
विटिलिगो जागरूकता की बात
मैंने उससे कहा—
“भाई, यह मेरी विटिलिगो यात्रा का हिस्सा है।
इसीलिए मैं एक ऐसा मंच बना रहा हूँ जो समाज को बताए कि सफेद दाग छूने से फैलने वाली बीमारी नहीं है।
इसके कारण किसी इंसान से दूरी बनाना गलत है।”
मेरी बात सुनकर वह बहुत खुश हुआ।
उसने कहा—
“दादा, जब भी मेरी जरूरत पड़े, जरूर बताइएगा।”
और उसने अपना फोन नंबर भी मेरे साथ साझा किया।
इस घटना ने क्या सिखाया?
मेरी विटिलिगो यात्रा में मुझे ऐसे अनेक अनुभव मिले हैं।
कभी समाज की गलत सोच देखने को मिलती है,
तो कभी किसी अनजान व्यक्ति की सच्ची इंसानियत दिल को छू जाती है।
उस दिन मैंने महसूस किया कि—
कभी-कभी एक अजनबी हमें बेहतर समझ लेता है,
और कई बार अपने ही लोग समझ नहीं पाते।
विटिलिगो में सबसे जरूरी क्या है?
हर उस व्यक्ति के लिए जिसे विटिलिगो (सफेद दाग) है,
सबसे ज्यादा जरूरी है परिवार का साथ और समर्थन।
अगर घर वाले सिर्फ इतना कह दें—
“तुम आगे बढ़ो, हम तुम्हारे साथ हैं।”
तो यकीन मानिए,
वह व्यक्ति हर मुश्किल का सामना कर सकता है।
समस्या सफेद दाग नहीं, सोच है
सच्चाई यह है कि—
समस्या सफेद दाग नहीं है…
समस्या समाज की सोच है।
हमें इस सोच को बदलना होगा।
जागरूकता ही इसका सबसे बड़ा समाधान है।
एक अपील
अगर आप भी चाहते हैं कि समाज में विटिलिगो को लेकर फैली गलतफहमियाँ दूर हों,
तो इस संदेश को ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुँचाइए।
आइए, मिलकर एक ऐसा समाज बनाएं जहाँ किसी को उसके रंग से नहीं,
उसके व्यक्तित्व से पहचाना जाए।
धन्यवाद। 🙏
– रविन्द्र जायसवाल
Vitiligo Support India
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