Vitiligo और प्यार की कहानी: स्वीकार्यता, उम्मीद और हिम्मत की मिसाल

नमस्कार दोस्तों,
मैं हूँ रविन्द्र जायसवाल और आप पढ़ रहे हैं Vitiligo Support India

आज मैं आपको एक ऐसी कहानी सुनाने जा रहा हूँ,
जो सिर्फ कहानी नहीं…
बल्कि समाज की सोच, रिश्तों की सच्चाई और
एक इंसान की टूटती–सँभलती ज़िन्दगी का आईना है।


💼 जीवन का पहला मोड़

कुछ दिनों पहले हमारी टीम की बातचीत
एक बड़ी प्रतिष्ठित कंपनी के प्रोडक्शन मैनेजर से हुई।
लगभग एक घंटे तक चली इस बातचीत में
उन्होंने अपनी जिंदगी का दर्द, टूटन और उम्मीद सब हमारे सामने रखा।

वे बताते हैं —
वे और उनकी पत्नी दोनों एक ही कंपनी में काम करते थे।
साथ काम करते-करते दोनों एक-दूसरे को समझने लगे,
अपनाने लगे… और फिर शादी कर ली।

सब कुछ ठीक चल रहा था।
लेकिन शादी के कुछ साल बाद अचानक उन्हें सफेद दाग़ हो गया।
बस, यहीं से उनकी जिंदगी बदल गई।


🩺 चुनौती और समाज की प्रतिक्रिया

उन्होंने देश–विदेश के डॉक्टर्स दिखाए, दवाएँ लीं।
आज भी इलाज चल रहा है।

लेकिन सफेद दाग़ आने के बाद उनकी पत्नी ने उन्हें छोड़ दिया।
सिर्फ इसलिए कि उन्हें सफेद दाग़ हो गया था।

लोग आज भी तरह–तरह की सलाह देते रहते हैं —

  • झाड़फूँक या टोटके

  • क्या खाएँ क्या न खाएँ

  • सफेद चीज़ों को हाथ न लगाएँ

वे कहते हैं —

“मैंने बहुत कुछ खाना-पीना छोड़ दिया है…
और शर्म की वजह से मैं कहीं आता-जाता भी नहीं…”


🌱 उम्मीद और जीवन की राह

लेकिन उन्होंने उम्मीद नहीं छोड़ी।
आज वे एक सरकारी आयुर्वेदिक संस्था से इलाज कर रहे हैं।

उनकी मासूम सलाह है —

“अगर कोई लड़की आपकी नजर में है तो बताइए… बस वह संस्कारी हो।
और इस काम में आपको पुण्य भी मिलेगा…”

यह टूटे दिल से निकली आस…
हमें यह सिखाती है कि स्वीकार्यता और उम्मीद ज़िंदगी की सबसे बड़ी ताक़त है।


🤝 Vitiligo Support India का संदेश

हमने उनसे कहा —

“भाई, समाज की परवाह मत कीजिए।
ज़िंदगी आपकी है। जो मन करे वह खाइए–पीजिए।
बस एक बात याद रखिए—किसी भी चीज़ की अति अच्छी नहीं होती।”

हमने उन्हें यह भी बताया कि बहुत जल्द Vitiligo Support India
एक Matrimonial Site लॉन्च करने जा रहा है —
एक ऐसी वेबसाइट जो सिर्फ सफेद दाग़ से प्रभावित लोगों के लिए होगी,
जहाँ लोग बिना डर, बिना शर्म, पूरी इज्जत और समझ के साथ
अपने जीवनसाथी खोज पाएँगे।

क्योंकि हर इंसान को सिर्फ प्यार ही नहीं,
स्वीकृति की भी जरूरत होती है।


🎵 प्रेरक कविता: “मैं हारूँगा नहीं”

रंग बदले दुनिया ने,
पर दिल मेरा टूटा नहीं…
सफेद दाग़ क्या आया मुझ पर,
मैंने जीना छोड़ा नहीं।

जो छोड़ गए रास्ते में…
उनका था बस साथ अधूरा,
पर खुद के साथ की ताक़त ने
मुझे बनाया और भी मजबूत, और भी पूरा।

मैं हारूँगा नहीं,
मैं रुकूँगा नहीं…
ज़िंदगी मेरी है,
मैं झुकूँगा नहीं…

ये दाग़ नहीं—कहानी है,
हिम्मत की, उम्मीद की…
रंग चाहे कम हो जाएँ,
पर रोशनी कम होती नहीं।

मैं चलूँगा…
मुस्कुराऊँगा…
दुनिया को दिखाऊँगा—
सफेद दाग़ कोई रुकावट नहीं,
ये तो बस एक नया पहचान-पत्र है
जो मुझे और चमकाता है।

मैं हारूँगा नहीं…
कभी नहीं।


🌱 Vitiligo Support India

यह मंच केवल जानकारी देने वाला नहीं,
बल्कि सहानुभूति, आत्मबल और प्रेरणा भी देता है।


🤝 Join the Movement

अगर यह कहानी आपको प्रेरित करती है —
तो इसे Like, Comment और Share ज़रूर करें।

Vitiligo से प्रभावित हर व्यक्ति तक
सही जानकारी और उम्मीद पहुँचाने के लिए
👉 www.vitiligosupportindia.org पर जुड़ें।

आइए मिलकर बदलाव लाएँ और एक-दूसरे को प्रेरित करें।

Loading

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *