हर नाम, एक पहचान – Vitiligo का समग्र संदेश
नमस्कार दोस्तों,
आज हम अपनी इस समझ और जागरूकता की यात्रा के अंतिम पड़ाव पर हैं।
इन दिनों हमने कई नाम सुने—
श्वित्र, किलास, फुलवा, दारुण, चारुण, Vitiligo, Leucoderma,
और भारत के अलग-अलग राज्यों की स्थानीय बोलियों में भी कई नाम।
पर इन सभी नामों के पीछे एक ही भावना छिपी है — “स्वीकृति की भावना।”
हर युग ने इस रोग को अलग नाम दिया:
कभी ज्ञान से, कभी विश्वास से, तो कभी भ्रांतियों से।
आयुर्वेद ने कहा — “श्वित्र”,
लोक भाषा ने कहा — “फुलवा”,
और आधुनिक विज्ञान ने कहा — “Vitiligo”।
लेकिन सबसे बड़ा सवाल नाम नहीं है।
सबसे बड़ा सवाल है —
हम इसे किस नज़र से देखते हैं?
कई बार लोग रोग को नहीं,
बल्कि रोगी को अलग कर देते हैं।
जबकि सच्चाई यह है —
सफ़ेद दाग़ न तो बुद्धि छीनता है, न प्रतिभा, न दिल का सौंदर्य।
यह केवल त्वचा का रंग बदलता है —
इंसान का मूल्य नहीं।
Vitiligo Support India का उद्देश्य भी यही है —
समाज को यह समझाना कि
“नाम बदलने से नहीं, नज़र बदलने से बदलाव आता है।”
तो आइए,
हर नाम के साथ एक नई पहचान जोड़ें —
आत्मविश्वास, सम्मान और प्रेम की पहचान।
क्योंकि अगर दुनिया रंगों से बनी है,
तो सफेद भी उसका सबसे शुद्ध और सुंदर रंग है।
मैं हूँ रविन्द्र जायसवाल और आप देख रहे हैं — Vitiligo Support India Channel
और हमारा संदेश —
“रंग नहीं, सोच बदलिए।”
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