Vitiligo, Friendship और Social Media: क्या हम सच्ची दोस्ती खोते जा रहे हैं?

नमस्कार दोस्तों,
मैं हूँ रविन्द्र जायसवाल और आप पढ़ रहे हैं Vitiligo Support India

कुछ दिन पहले मैं सुधीर चौधरी जी का कार्यक्रम “डीकोड” देख रहा था।
उन्होंने वहाँ कुछ सवाल पूछे, जो सीधे दिल को छू गए —

  • आप आख़िरी बार अपने दोस्त से कब मिले थे?

  • क्या आप अब भी अपने बेस्ट फ्रेंड के लिए समय निकाल पाते हैं?

  • महीने में कितनी बार दोस्तों से आमने-सामने मुलाक़ात होती है?

इन सवालों ने मुझे सोचने पर मजबूर कर दिया।
क्योंकि ये सवाल सिर्फ आम लोगों के लिए नहीं,
हम जैसे Vitiligo से प्रभावित लोगों के लिए और भी ज़्यादा मायने रखते हैं।


💭 Vitiligo और खुद को अलग कर लेना

अक्सर हम अपने ही मन में एक दीवार खड़ी कर लेते हैं —

“मेरे सफेद दाग देखकर कोई दोस्ती करेगा भी या नहीं?”
“क्या कोई मेरे साथ खुलकर बैठना पसंद करेगा?”

सच कहूँ,
मैं भी कभी ऐसा ही सोचता था।

लेकिन समय के साथ मुझे एहसास हुआ —
👉 गलत Vitiligo नहीं, हमारी सोच थी।


🤝 दोस्ती का मेरा अनुभव

मैं बचपन से ही दोस्त बनाने में आगे रहा हूँ।
यहाँ तक कि घरवाले मज़ाक में कहते थे —
“इतने दोस्त बना रखे हैं तुमने!” 😄

आज भी मेरे बचपन के दोस्त मेरे साथ हैं,
जिनसे मैं दिल की हर बात खुलकर कर सकता हूँ।

पिछले साल की बात है —
मैं अपने जन्मदिन पर प्रयागराज में था।
मेरे दोस्तों ने उस दिन को इतना खास बना दिया
कि वो पल आज भी मेरी ताक़त हैं।

👉 जब मैं दोस्तों के साथ होता हूँ,
तो सच में ज़िंदगी की सारी परेशानियाँ पीछे छूट जाती हैं।


⏳ ज़िम्मेदारियाँ और दूरी

यह भी सच है कि
शादी और ज़िम्मेदारियों के बाद
दोस्तों के लिए समय निकालना मुश्किल हो जाता है।

लेकिन फिर भी,
सोशल मीडिया के ज़रिए
हम कॉल और मैसेज से जुड़े रहते हैं।

यहीं पर सुधीर चौधरी जी की एक बात बहुत सटीक लगी —

“Social media अब हमारी दोस्ती के बीच सबसे बड़ी दीवार बन चुका है।”


📱 Social Media: दोस्त ज़्यादा, अपनापन कम

आज हमारी friend list में सैकड़ों नाम हैं,
लेकिन —

  • एक ऐसा दोस्त कम है

  • जिससे सुख-दुख बाँट सकें

  • जिसके सामने आँसू छिपाने न पड़ें

नई रिसर्च बताती है कि
सोशल मीडिया ने हमसे —

❌ ध्यान
❌ समय
❌ भरोसा

तीनों छीन लिया है।
और दोस्ती इन्हीं तीन चीज़ों पर टिकी होती है।


🎶 यादें और हक़ीक़त

याद है वो दिन,
जब दोस्तों के साथ “याराना”
या “तेरा यार हूँ मैं” गाया करते थे?

वादा करते थे —
“दोस्ती कभी नहीं टूटेगी।”

आज वो गाने हमारी playlist में हैं,
और दोस्त… online status में।


📊 रिसर्च क्या कहती है?

हाल ही में 13,000 लोगों पर हुए एक सर्वे में सामने आया कि —

✔️ जो लोग हफ्ते में कम से कम एक बार आमने-सामने मिलते हैं,
उनकी मानसिक और शारीरिक सेहत बेहतर रहती है।

❌ जो लोग सिर्फ कॉल और मैसेज तक सीमित रहते हैं,
उन्हें वही लाभ नहीं मिलता।


❤️ दोस्ती: चेहरा नहीं, एहसास

दोस्ती कोई चेहरा नहीं,
एक एहसास है।

कभी मुस्कान,
कभी आँसू का साथ।

दाग हों, दुख हों या डर का साया —
सच्चा दोस्त वहीं होता है, जो साथ निभाए साया-साया।

अगर ज़िंदगी में एक भी ऐसा दोस्त है,
तो समझिए —
👉 आप सच में अमीर हैं।


🌱 Vitiligo और अकेलापन

मेरे अनुभव में,
कई Vitiligo प्रभावित लोग —
खासकर अविवाहित —
सोशल मीडिया को ही दोस्ती का ज़रिया बना लेते हैं।

क्योंकि सामने मिलने में डर लगता है —

  • वो क्या सोचेगा?

  • कैसा रिएक्शन देगा?

मुझे भी कई बार ऐसा महसूस हुआ है।
और अगर सामने वाले के व्यवहार में
थोड़ा सा भी बदलाव दिखा —
तो मैं खुद पीछे हट गया।


🎯 अंतिम संदेश

आज मैं दिल से यही कहना चाहता हूँ —

👉 एक सच्चा दोस्त ज़रूर बनाइए।
कोई ऐसा जिससे आप बिना झिझक बात कर सकें।

क्योंकि ज़िंदगी के आख़िरी पड़ाव में —
आपके साथ
आपकी पत्नी और आपका सच्चा दोस्त ही होता है।


🌱 Vitiligo Support India

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भावनात्मक सहारा और आत्मबल भी देता है।


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