श्वित्र के प्रकार: चरक संहिता के अनुसार विटिलिगो की अवस्थाएँ
🌿 प्रस्तावना
आज हम बात करेंगे चरक संहिता के चिकित्सा स्थान अध्याय 7 के कुछ महत्वपूर्ण अंशों की,
जहाँ सफ़ेद दाग़ (Vitiligo) को “श्वित्र” कहा गया है।
आचार्य चरक ने इस रोग को उसकी गहराई और धातु-अश्रय (tissue involvement) के आधार पर
तीन प्रकारों में बाँटा है —
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दारुण (Dāruṇa)
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चारुण (Chāruṇa)
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किलास (Kilāsa)
आइए समझते हैं — इन तीनों अवस्थाओं का अर्थ, लक्षण, और उपचार की संभावनाएँ क्या हैं।
🔶 1. दारुण श्वित्र (Dāruṇa Śvitra)
📍 धातु-अश्रय: रक्त धातु (Blood tissue)
📍 रंग: लाल या गुलाबी (Reddish patches)
लक्षण:
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त्वचा पर हल्के लाल या गुलाबी रंग के दाग दिखाई देते हैं।
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इन दागों में हल्की जलन, खुजली या सूजन हो सकती है।
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यह रोग की प्रारंभिक अवस्था होती है।
आयुर्वेदिक दृष्टि से:
👉 यदि इस चरण में सही चिकित्सा की जाए —
तो रोग साध्य (Curable) माना गया है।
📖 संदर्भ: चरक संहिता, चिकित्सा स्थान 7/174
🟠 2. चारुण श्वित्र (Chāruṇa Śvitra)
📍 धातु-अश्रय: मांस धातु (Muscle tissue)
📍 रंग: ताम्रवर्ण या ताम्राभ (Coppery / Brownish patches)
लक्षण:
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दाग़ गहरे रंग के और स्थिर हो जाते हैं।
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रोग की प्रगति बढ़ जाती है।
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यह अवस्था लंबे समय तक बनी रहती है।
आयुर्वेदिक दृष्टि से:
👉 यह रोग की मध्यम अवस्था है,
जहाँ उपचार कठिन हो जाता है लेकिन असंभव नहीं।
📖 संदर्भ: चरक संहिता, चिकित्सा स्थान 7/174
⚪ 3. किलास श्वित्र (Kilāsa Śvitra)
📍 धातु-अश्रय: मेद धातु (Fat tissue)
📍 रंग: श्वेत (Pure white depigmented patches)
लक्षण:
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त्वचा पूरी तरह सफेद हो जाती है।
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दागों के बाल भी सफेद हो सकते हैं।
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किसी प्रकार की संवेदना कम हो जाती है।
आयुर्वेदिक दृष्टि से:
👉 यह रोग की अंतिम और असाध्य अवस्था है,
जहाँ औषधियों का प्रभाव बहुत सीमित रहता है।
📖 संदर्भ: चरक संहिता, चिकित्सा स्थान 7/174
🧠 सारांश तालिका
| प्रकार | धातु-अश्रय | रंग | अवस्था | उपचार की संभावना |
|---|---|---|---|---|
| दारुण | रक्त | लाल / गुलाबी | प्रारंभिक | साध्य (Curable) |
| चारुण | मांस | ताम्रवर्ण | मध्यम | कठिन (Difficult) |
| किलास | मेद | श्वेत | अंतिम | असाध्य (Incurable) |
आचार्य चरक बताते हैं कि श्वित्र त्रिदोषज रोग है —
अर्थात् यह वात, पित्त और कफ तीनों दोषों की असंतुलन से उत्पन्न होता है।
जैसे-जैसे यह रोग गहराई में जाता है और धातु में प्रवेश करता है,
वैसे-वैसे इसका उपचार कठिन होता जाता है।
👉 इसलिए आयुर्वेद यह सलाह देता है कि
रोग की प्रारंभिक अवस्था में पहचान और उपचार सबसे प्रभावी होते हैं।
🌿 Vitiligo Support India का संदेश:
“विटिलिगो को समझना, स्वीकारना और सही समय पर उपचार लेना —
यही स्वास्थ्य और आत्मविश्वास की पहली सीढ़ी है।”
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