किलास (Kilāsa) – वर्ण के विकार की पहचान, दृष्टिकोण की नहीं
🪷 प्रस्तावना
आयुर्वेद केवल रोगों का नहीं, जीवन के संतुलन का विज्ञान है।
इसी में एक शब्द आता है — “किलास”, जो सुश्रुत संहिता में “श्वित्र” (Vitiligo) के समानार्थी के रूप में वर्णित है।
परंतु “किलास” केवल त्वचा के रंग में परिवर्तन नहीं, बल्कि शरीर के भीतर छिपे दोषों का संकेत है।
📜 आयुर्वेदिक विवरण
आचार्य सुश्रुत के अनुसार —
“किलासं नाम वर्णविकारः। न पीडायते, न वेदनायते।”
अर्थात् — किलास वह अवस्था है जहाँ त्वचा का वर्ण असमान हो जाता है —
कहीं श्वेत (सफेद), कहीं कृष्ण (गहरा)।
इसमें दर्द या जलन नहीं होती,
लेकिन यह बताता है कि रक्त और पित्त दोष शरीर में असंतुलित हो गए हैं।
👉 किलास को कई बार “आरंभिक श्वित्र” भी कहा गया है,
क्योंकि यह वह अवस्था है जहाँ उचित चिकित्सा, आहार और संयम से रोग को फैलने से रोका जा सकता है।
🌿 अर्थ और चिकित्सा दृष्टि
“किलास” शब्द संस्कृत के “कलुष” से बना है —
जिसका अर्थ है “मलिन होना” या “वर्ण दोष आना”।
आयुर्वेद ने इस कलुष को केवल शरीर का माना —
पर समाज ने इसे व्यक्ति के स्वभाव और भाग्य से जोड़ दिया।
यही सबसे बड़ी भूल रही।
🕉️ सामाजिक दृष्टिकोण
आचार्य सुश्रुत ने स्पष्ट कहा है —
“न स्पृशतेन सजनाः, न संकर्षणीयम्।”
(Na sprushaten sajanāḥ, na saṅkarṣaṇīyam.)
अर्थ — “यह रोग स्पर्श से नहीं फैलता,
अतः इससे किसी को दूर रखने की आवश्यकता नहीं।”
लेकिन दुर्भाग्यवश समाज ने त्वचा के रंग के विकार को
छूत और कलंक मान लिया।
जबकि “किलास” हमें सिखाता है कि —
“रोग शरीर में है, आत्मा में नहीं।”
🌼 आधुनिक संदर्भ
आज इसे हम Vitiligo के नाम से जानते हैं।
आधुनिक विज्ञान भी यही मानता है कि यह Autoimmune Condition है —
जहाँ शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली गलती से मेलानोसाइट्स पर हमला करती है।
आयुर्वेद और विज्ञान, दोनों का मत एक ही है —
यह संक्रामक नहीं, बल्कि शरीर के भीतर का असंतुलन है।
💡 संदेश
किलास हमें एक सरल लेकिन गहरा संदेश देता है —
“हर रंग में सौंदर्य है, हर त्वचा में जीवन है।”
रंग को नहीं, दृष्टिकोण को शुद्ध कीजिए।
“किलास” केवल एक त्वचा विकार नहीं,
बल्कि शरीर, मन और समाज की शुद्धि की प्रक्रिया है।
जब हम इसे कलंक नहीं, संकेत समझेंगे —
तभी सच्ची चिकित्सा संभव होगी।
🎙️ लेखक का संदेश
“मैं हूँ रविन्द्र जायसवाल, और आप देख रहे हैं Vitiligo Support India Channel।”
हमारा संदेश सरल है —
🌈 “रंग नहीं, सोच बदलिए।”
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