नमस्कार दोस्तों,
मैं हूँ रविन्द्र जायसवाल और आप पढ़ रहे हैं Vitiligo Support India।
कुछ दिन पहले दिल्ली में हुई एक मुलाकात ने हमें अंदर तक झकझोर दिया — और शायद आपकी सोच भी बदल दे।
एक साधारण बातचीत, जो असाधारण बन गई
हमारी टीम के एक सदस्य की मुलाकात दिल्ली में एक ऑटो रिक्शा चालक से हुई। उनकी पीठ और हाथों पर सफेद दाग़ स्पष्ट दिखाई दे रहे थे। सामान्य बातचीत शुरू हुई, लेकिन धीरे-धीरे वह बातचीत एक ऐसी कहानी में बदल गई जिसने दिल को छू लिया।
जब उनसे पूछा गया —
“बाबा, आपको यह सफेद दाग़ कब से है?”
उन्होंने शांत स्वर में कहा —
“बचपन से… मुझे याद भी नहीं। माँ बताती थीं कि जब मैं छोटा था तभी हो गया था।”
वे मूल रूप से बिहार के निवासी हैं, लेकिन कई दशकों से दिल्ली में रह रहे हैं। उनके बच्चे पढ़-लिख चुके हैं — कोई शिक्षक है, कोई नौकरी कर रहा है। जीवन आगे बढ़ चुका है… लेकिन कुछ यादें आज भी ज़ख्म जैसी हैं।
बचपन का वह घाव
उन्होंने बताया —
“जब मैं तीसरी कक्षा में था, क्लास टीचर ने कहा था — तुम अलग बैठो, बाकी बच्चों से दूर।”
सोचिए…
जिस शिक्षक पर बच्चे को बराबरी और सुरक्षा का एहसास देने की ज़िम्मेदारी होती है, अगर वही उसे अलग कर दे — तो उस मासूम मन पर क्या बीतती होगी?
यह केवल एक घटना नहीं, बल्कि समाज में मौजूद अज्ञानता का आईना है।
आज भी मौजूद हैं गलतफहमियाँ
आज भी कई लोग सफेद दाग़ को बिना समझे छूत की बीमारी मान लेते हैं।
हमारी टीम ने उन्हें बताया कि देश के कुछ हिस्सों में आज भी भेदभाव देखने को मिलता है:
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मध्यप्रदेश के कुछ गाँवों में सफेद दाग़ वाले लोगों के अंतिम संस्कार में भेदभाव की घटनाएँ सामने आई हैं।
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एक डॉक्टर ने केवल इस वजह से विवाह से इनकार कर दिया क्योंकि लड़की के माता-पिता को सफेद दाग़ था।
यह सुनकर वे चौंक गए —
“अभी भी लोग ऐसा सोचते हैं?”
हाँ, दुर्भाग्य से… कई जगह सोच अभी भी पीछे है।
दिल्ली की एक और सच्चाई: पैसा सब कुछ नहीं
उन्होंने एक और घटना साझा की।
एक बार वे दिल्ली के ब्रिज विहार इलाके में इन्वर्टर लगाने गए। घर के मालिक को भी सफेद दाग़ था। उन्होंने पूछा — “आपने इलाज कराया?”
उस व्यक्ति ने कहा —
“इसका कोई इलाज नहीं। अगर होता तो मैं विदेश जाकर करा लेता। मेरे पास बहुत पैसा है।”
यहाँ साफ था —
बीमारी से पहले निराशा और भ्रम का इलाज ज़रूरी है।
एक उम्मीद की किरण
जब हमारी टीम ने उन्हें बताया कि हम सफेद दाग़ से प्रभावित लोगों के लिए एक NGO बनाने की तैयारी कर रहे हैं, तो उनके चेहरे पर चमक आ गई।
उन्होंने आशीर्वाद देते हुए कहा —
“बेटा, तुम जो कर रहे हो वह बहुत बड़ा काम है। भगवान तुम्हें सफलता दे।”
उनकी आँखों में सम्मान था — और उम्मीद भी।
सफेद दाग़: सच क्या है?
सफेद दाग़, जिसे चिकित्सा भाषा में Vitiligo कहा जाता है, कोई छूत की बीमारी नहीं है।
यह केवल त्वचा में रंग बनाने वाली कोशिकाओं (melanocytes) की कमी के कारण होता है।
✔ यह छूने से नहीं फैलता
✔ यह साथ बैठने से नहीं फैलता
✔ यह खून से नहीं फैलता
✔ यह किसी की गलती नहीं है
सोच बदलनी ही असली इलाज है
इस मुलाकात ने हमें एक बात स्पष्ट कर दी —
बीमारी से ज़्यादा समाज की सोच लोगों को तोड़ती है।
अगर हम जागरूकता फैलाएँ, संवेदनशीलता बढ़ाएँ और सम्मान देना सीखें —
तो आधी लड़ाई वहीं जीत ली जाएगी।
सफेद दाग़ से अधिक खतरनाक है —
अज्ञानता और भेदभाव।
एक सामूहिक जिम्मेदारी
अगर हमारा छोटा सा प्रयास किसी की ज़िंदगी में सम्मान और आत्मविश्वास वापस ला सके —
तो इससे बड़ा पुण्य कोई नहीं।
आइए मिलकर भ्रम नहीं, समझ फैलाएँ।
डर नहीं, सम्मान बढ़ाएँ।
दूरी नहीं, अपनापन बनाएँ।
आप अकेले नहीं हैं।
हम साथ हैं। 🙏
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