
“क्या मैं अशुभ हूँ?” | विटिलिगो और परंपराओं से जुड़ा सच
“क्या मैं अशुभ हूँ?” | विटिलिगो और परंपराओं से जुड़ा सच By: Ravindra Jaiswal “क्या सिर्फ हमारी त्वचा का रंग बदल जाने से हम किसी शुभ कार्य के लायक नहीं रहते?” “समाज की सबसे बड़ी बीमारी यह नहीं है कि वो हमें अलग समझता है,बल्कि यह है कि वो हमें ‘अशुभ’ मान लेता है।” 🕯️
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