कल ट्रेन में एक छोटी-सी बातचीत ने मेरे दिल को छू लिया… 💜
कल मैं रोज़ की तरह ट्रेन से हाथरस जा रहा था। सीट पर बैठा ही था कि सामने बैठी चार महिलाओं में से एक ने धीरे से दूसरी महिला से कहा—
“मेरे भाई को पहले सिर्फ़ एक दाना था… अब पूरे सिर तक सफेद दाग हो गया है।”
मैंने उनकी बात सुन ली और उनसे कहा—
“इसमें परेशानी की क्या बात है? सफेद दाग कोई छुआछूत की बीमारी नहीं है।”
उन्होंने कहा,
“जी हाँ, हम भी जानते हैं… लेकिन अब बहुत लोगों को दिखाई देने लगा है।”
उनकी यह बात सुनकर मैंने उनसे कहा—
हमारे समाज में आज लगभग हर दूसरे व्यक्ति को कोई न कोई स्वास्थ्य समस्या है—ब्लड प्रेशर, ब्लड शुगर, थायरॉइड और न जाने कितनी बीमारियाँ… जिनके लिए कई लोगों को जीवनभर दवाइयाँ लेनी पड़ती हैं।
लेकिन विटिलिगो से जूझने वाले लोगों की सबसे बड़ी परेशानी अक्सर बीमारी नहीं… लोगों की सोच होती है।
हम किसी को नुकसान नहीं पहुँचाते।
हमसे किसी को संक्रमण नहीं होता।
हम भी बिल्कुल सामान्य जीवन जी सकते हैं।
फिर भी कई बार लोग सिर्फ़ हमारे शरीर पर दिखने वाले सफेद दागों की वजह से हमसे दूरी बना लेते हैं।
मैंने उन्हें बताया कि कुछ दिन पहले ट्रेन में मेरे पास बैठे एक व्यक्ति ने मेरे सफेद दाग देखे और सीट छोड़कर चला गया था।
फिर मैंने उन्हें अपना कार्ड दिया और कहा—
“हम एक ऐसा परिवार बना रहे हैं, जहाँ सफेद दाग वाले लोग एक-दूसरे का साथ देंगे। जिसके पास जो ज्ञान होगा, वह दूसरों के साथ बाँटेगा। हम एक-एक करके लोगों को जोड़ेंगे… और एक-दूसरे की ताकत बनेंगे।”
तभी सामने बैठी दूसरी महिला ने कहा—
“मेरी जेठानी को भी सफेद दाग है… मुझे भी एक कार्ड दे दीजिए।”
उन्होंने जब दूसरा कार्ड माँगा, तो सच कहूँ… *मुझे बहुत खुशी हुई। 💜
क्योंकि इस बार कोई मुझसे दूर नहीं जा रहा था…
बल्कि कोई खुद आगे बढ़कर जुड़ना चाहता था।
शायद वह कार्ड मुझे कभी फोन करने का कारण बनेगा।
और सच कहूँ… *मुझे उस फोन का इंतज़ार रहेगा।* 📞💜
क्योंकि बदलाव एक दिन में नहीं आता…
लेकिन एक बातचीत से ज़रूर शुरू हो सकता है।
और हम यह बदलाव लाएँगे—
एक व्यक्ति से… एक परिवार से… एक समाज से।* 💪💜
सफेद दाग शर्म नहीं है।
सफेद दाग छुआछूत नहीं है।
हम अलग नहीं हैं… हम भी इसी समाज का हिस्सा हैं।**
💜 *Vitiligo Support India — साथ, सम्मान और आत्मविश्वास की ओर।
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